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अमीर खुसरो।। खुसरो रैन सुहाग की, जगी पी के संग। तन मेरो मन पी को, दोऊ भय एक रंग।। ये दोहा खुसरो जी के माध्यम रचा गया है। इस दोहा के माध्यम खुसरो जी इस संसार को प्रेम के बारे में बता रहे है । प्रेम का अर्थ और प्रेम में विलीन हो गए दो आत्माओं को उन्होंने एक आत्मा बताया है। इनकी दोहा पूर्ण रूप से आध्यात्मिकता के रंग में रंगा हुआ है। ये दोहा ब्रजभाषा में लिखा गया है। अर्थात् ..... सुहाग रात में पिया के संग जागकर बिताई है। यह तन ही मेरा है ,मन तो पिया का है, पिया मिलन के उपरांत तो दोनो एकाकार हो गए,एक दूसरे में विलीन हो गए।। यह "पी"का अर्थ भगवान से किया गया है ,और नायिका "आत्मा"का बोध कराती है।"रैन" सांसारिकता को सूचित करता है।।❤️❤️❤️🥰🥰
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